गोल्ड इन्वेस्टमेंट: भारतीयों ने सोने से दूरी बनाई, लेकिन चीन में जबरदस्त डिमांड से दाम फिर बढ़ने की उम्मीद

By Ravi Singh

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Alt Text for featured image : भारत और चीन में सोने की डिमांड तुलना, गोल्ड बार और ज्वेलरी के साथ ग्राफ दिखाते हुए
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“भारतीय बाजार में सोने की डिमांड में गिरावट आई है, जबकि चीन में निवेश और सेफ-हेवन डिमांड से खपत मजबूत बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड ऊंचाई के बावजूद भारत में ज्वेलरी खरीदारी घटी है, लेकिन चीन के मजबूत बार-कॉइन और ETF खरीद से सोने के दामों में फिर उछाल आने की संभावना बढ़ गई है।”

गोल्ड इन्वेस्टमेंट में भारत-चीन का अंतर

भारत में सोने की कुल डिमांड 2025 में 11% घटकर 710.9 टन रह गई, जो पांच साल का निचला स्तर है। 2026 में यह और घटकर 600-700 टन के बीच रहने का अनुमान है। मुख्य वजह रिकॉर्ड ऊंचे दाम हैं, जिन्होंने ज्वेलरी खरीद को बुरी तरह प्रभावित किया। ज्वेलरी डिमांड 24% गिरकर 430.5 टन पर आ पहुंची, जो लगभग 30 साल का न्यूनतम स्तर (कोविड प्रभाव को छोड़कर) है। उपभोक्ता बजट से बाहर हो गए, क्योंकि अस्थिर और तेज बढ़ोतरी ने स्थिरता पसंद करने वाले खरीदारों को दूर कर दिया।

दूसरी ओर, निवेश डिमांड में 17% की बढ़ोतरी हुई, खासकर गोल्ड ETF और बार-कॉइन में। स्टॉक मार्केट की कमजोर प्रदर्शन के कारण निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए सोने की ओर मुड़े। लेकिन कुल मिलाकर ज्वेलरी की गिरावट ने निवेश की बढ़त को संतुलित कर दिया।

चीन में स्थिति उलट है। 2025 में कुल खपत में गिरावट आई, लेकिन बार और कॉइन की बिक्री में तेज उछाल आया, जो पहली बार ज्वेलरी से आगे निकल गई। सेफ-हेवन डिमांड, प्रॉपर्टी सेक्टर की कमजोरी और आर्थिक अनिश्चितता ने निवेशकों को सोने की ओर धकेला। 2026 की शुरुआत मजबूत रही—जनवरी में शंघाई गोल्ड एक्सचेंज से 126 टन निकासी हुई, जो पिछले साल से थोड़ी अधिक है। स्प्रिंग फेस्टिवल (चीनी न्यू ईयर) से पहले ज्वेलरी और बुलियन दोनों में रेस्टॉकिंग हुई।

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चीनी गोल्ड ETF में जनवरी में रिकॉर्ड 38 टन (US$6.2bn) का इजाफा हुआ, जबकि पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC) ने लगातार खरीद जारी रखी—जनवरी में 1.2 टन जोड़कर कुल 2,308 टन पहुंच गया। प्रीमियम $35 प्रति औंस तक पहुंचा, लेकिन Lunar New Year से पहले डिमांड बढ़ी।

वर्तमान सोने के दाम और ट्रेंड

भारत में आज (13 फरवरी 2026) 24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम ₹1,55,780 के आसपास है, जबकि 22 कैरेट ₹1,42,800 पर। हाल के दिनों में ₹262 प्रति ग्राम की गिरावट आई, लेकिन वैश्विक स्तर पर स्पॉट गोल्ड $5,000+ प्रति औंस के करीब है। MCX पर फ्यूचर्स ₹1,58,000+ के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं।

दुबई में सोना सस्ता है—भारत से ₹7,000+ प्रति 10 ग्राम कम—लेकिन इंपोर्ट ड्यूटी और टैक्स के कारण अंतर बना रहता है।

दाम बढ़ने की वजहें

चीनी डिमांड का दबाव : चीन दुनिया का सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। यहां निवेश डिमांड 28% बढ़ी, जबकि ज्वेलरी घटी। 2026 में अगर अर्थव्यवस्था मजबूत हुई तो दोनों सेगमेंट में उछाल संभव। स्पेकुलेटिव एक्टिविटी और ETF होल्डिंग्स दोगुनी हो गईं।

ग्लोबल फैक्टर : सेंट्रल बैंक खरीद (2025 में 863 टन), जियोपॉलिटिकल टेंशन, Fed रेट कट की उम्मीद और डॉलर कमजोरी से सोना मजबूत। कुल ग्लोबल डिमांड 2025 में 5,000 टन+ पहुंची।

भारत में शिफ्ट : ज्वेलरी से निवेश की ओर मुड़ाव। ETF में इनफ्लो बढ़ रहा है। लेकिन कुल डिमांड कम होने से लोकल प्रीमियम घटे हैं—कुछ जगह डिस्काउंट भी दिखा।

तुलनात्मक डेटा (2025 vs अनुमान 2026)

निवेशकों के लिए सलाह

पैरामीटरभारत (2025)भारत (2026 अनुमान)चीन (2025 ट्रेंड)चीन (2026 शुरुआत)
कुल डिमांड (टन)710.9600-700गिरावटमजबूत
ज्वेलरी डिमांड430.5 (-24%)और गिरावट-25%रिकवरी संभव
बार/कॉइन निवेश+17%मजबूत+28%रिकॉर्ड इनफ्लो
ETF/इंस्टीट्यूशनलबढ़तनिरंतरदोगुनाUS$6.2bn जनवरी

उच्च दामों पर ज्वेलरी खरीद सावधानी से करें—वजन कम रखें या डिजिटल गोल्ड चुनें। निवेश के लिए बार, कॉइन या ETF बेहतर, क्योंकि चीन की डिमांड से ग्लोबल प्राइस सपोर्ट मिलेगा। अगर वैश्विक अनिश्चितता बनी रही तो दाम फिर ₹1,60,000+ प्रति 10 ग्राम तक जा सकते हैं।

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Disclaimer : यह न्यूज और मार्केट ट्रेंड्स पर आधारित रिपोर्ट है। निवेश से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।

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Ravi Singh

मेरा नाम रवि सिंह है, मैं एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करता हूँ और मुझे लेख लिखना बहुत पसंद है। 4 साल के ब्लॉगिंग अनुभव के साथ मैं हमेशा दूसरों को प्रेरित करने और उन्हें सफल ब्लॉगर बनाने के लिए ज्ञान साझा करने के लिए तैयार रहता हूँ।

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