पीएम राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल हर व्यक्ति को दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों तक अधिकतम 1.5 लाख रुपये का कैशलेस इलाज मिलेगा। योजना किसी भी सड़क पर हुई दुर्घटना पर लागू होती है, जिसमें जीवनरक्षक उपचार को प्राथमिकता दी जाती है। गैर-जीवनघातक मामलों में 24 घंटे और जीवनघातक मामलों में 48 घंटे तक स्टेबिलाइजेशन ट्रीटमेंट उपलब्ध है। पुलिस प्रमाणीकरण डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगा, जिससे इलाज में देरी न हो। योजना सेवा तीर्थ से पीएम मोदी के पहले फैसले के रूप में शुरू हुई है, जिसका उद्देश्य गोल्डन ऑवर में जान बचाना है।
सड़क दुर्घटना पीड़ितों के इलाज का खर्च उठाएगी सरकार, मिलेगा ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज; समझ लीजिए सारे नियम
केंद्र सरकार ने पीएम राहत (Road Accident Victim Hospitalization and Assured Treatment) योजना को मंजूरी दी है, जो सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए क्रांतिकारी कदम साबित होगी। यह योजना मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 162 के तहत लागू की गई है और इसका मुख्य लक्ष्य दुर्घटना के बाद पहले घंटे (गोल्डन ऑवर) में त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करना है, ताकि मौतों को रोका जा सके।
योजना के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:
कवरेज राशि और अवधि : प्रत्येक पात्र पीड़ित को दुर्घटना की तिथि से अधिकतम 7 दिनों तक 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। यह राशि प्रति दुर्घटना प्रति व्यक्ति लागू होती है।
स्टेबिलाइजेशन ट्रीटमेंट : यदि मामला जीवन को खतरे में नहीं डालने वाला है, तो अधिकतम 24 घंटे तक स्टेबिलाइजेशन उपचार दिया जाएगा। जानलेवा मामलों में यह अवधि 48 घंटे तक बढ़ सकती है।
लागू होने का दायरा : योजना देश की किसी भी श्रेणी की सड़क (राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, जिला सड़कें या ग्रामीण सड़कें) पर मोटर वाहन से हुई दुर्घटना पर लागू होती है। इसमें दोपहिया, चारपहिया या अन्य मोटर वाहन शामिल हैं।
पात्रता : दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचने वाले पीड़ित पात्र होंगे। राष्ट्रीयता की कोई बाध्यता नहीं है – भारतीय हो या विदेशी, सभी लाभ ले सकेंगे। पहले से किसी अन्य सरकारी योजना (जैसे आयुष्मान भारत) के लाभार्थी भी इस योजना का प्राथमिक लाभ लेंगे।
हॉस्पिटल और इलाज की प्रक्रिया : आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PM-JAY) के तहत पैनल वाले सभी अस्पताल स्वतः इस योजना के लिए डिजाइनेटेड माने जाएंगे। अतिरिक्त अस्पतालों को राज्य स्तर पर नामांकित किया जा सकता है। अस्पताल में भर्ती होने पर कोई अग्रिम भुगतान नहीं करना होगा। इलाज के बाद अस्पताल डिजिटल क्लेम सिस्टम के माध्यम से सरकार से राशि प्राप्त करेंगे।
डिजिटल एकीकरण : योजना eDAR (Electronic Detailed Accident Report) और TMS 2.0 (Transaction Management System) प्लेटफॉर्म पर आधारित है। पुलिस द्वारा दुर्घटना रिपोर्ट दर्ज होने पर पीड़ित का eDAR ID जनरेट होता है, जो TMS से लिंक होकर इलाज को ट्रैक करता है। पुलिस प्रमाणीकरण डिजिटल रूप से होता है, जिससे इलाज में देरी नहीं होती।
फंडिंग : इलाज का खर्च मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड से वहन किया जाएगा, जिसमें इंश्योर्ड और अनइंश्योर्ड वाहनों से प्राप्त राशि शामिल है।
योजना के लाभ और महत्व
भारत में हर साल लाखों सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें से कई मौतें तुरंत इलाज न मिलने से होती हैं। अध्ययनों के अनुसार, गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचने पर 50% मौतें रोकी जा सकती हैं।
योजना में कोई रजिस्ट्रेशन, आय प्रमाण पत्र या बीमा पॉलिसी की जरूरत नहीं। पीड़ित या उनके परिजन को सिर्फ अस्पताल पहुंचना है।
Good Samaritan जो पीड़ित को अस्पताल पहुंचाते हैं, उन्हें भी प्रोत्साहन मिल सकता है (योजना के दिशानिर्देशों में प्रावधान)।
यह योजना अन्य केंद्रीय/राज्य योजनाओं से अलग है और प्राथमिकता प्राप्त करती है।
कैसे लाभ उठाएं
दुर्घटना होने पर तुरंत ERSS 112 हेल्पलाइन पर कॉल करें या पुलिस को सूचित करें।
पीड़ित को निकटतम डिजाइनेटेड अस्पताल (AB-PM-JAY पैनल वाले) ले जाएं।
अस्पताल में eDAR ID या पुलिस रिपोर्ट के आधार पर कैशलेस इलाज शुरू होगा।
इलाज के दौरान कोई नकद भुगतान नहीं।
यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा तीर्थ से पहले फैसले के रूप में शुरू हुई, जो सेवा, करुणा और नागरिक सुरक्षा पर केंद्रित है। इससे सड़क सुरक्षा में नया अध्याय जुड़ेगा और लाखों परिवारों को आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी।





