“ईरान के ड्रोन हमले से सऊदी अरामको की रास तनूरा रिफाइनरी बंद, आग पर काबू लेकिन ग्लोबल ऑयल मार्केट में हलचल; दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको सऊदी सरकार की है, जबकि मुकेश अंबानी की रिलायंस के साथ पहले 20% स्टेक डील की बातचीत हुई थी जो बाद में रद्द हो गई।”
दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको की रिफाइनरी पर ईरान का ड्रोन हमला, कौन है Aramco का मालिक? मुकेश अंबानी से खास कनेक्शन
मध्य पूर्व में जारी तनाव ने नया मोड़ ले लिया है। ईरान ने सोमवार को सऊदी अरब के रास तनूरा रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया, जो सऊदी अरामको की सबसे बड़ी और दुनिया की प्रमुख रिफाइनरियों में से एक है। इस हमले के बाद रिफाइनरी को सावधानी के तौर पर बंद कर दिया गया। सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दो ड्रोन को रोक लिया गया और उन्हें नष्ट कर दिया गया, लेकिन मलबे से सीमित आग लग गई जो अब नियंत्रण में है। इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।
रास तनूरा रिफाइनरी की क्षमता 5,50,000 बैरल प्रतिदिन है और यह सऊदी अरब के खाड़ी तट पर स्थित ऊर्जा परिसर का हिस्सा है, जो कच्चे तेल के निर्यात के लिए महत्वपूर्ण टर्मिनल भी काम करती है। हमले के बाद डीजल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका से गैसोइल फ्यूचर्स में तेजी आई है। यह हमला ईरान की ओर से अमेरिका-इजरायल हमलों के जवाब में गल्फ देशों पर की गई स्ट्राइक्स की श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें अबू धाबी, दुबई, दोहा और अन्य स्थानों को भी निशाना बनाया गया।
सऊदी अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी है, जिसकी डेली प्रोडक्शन क्षमता लाखों बैरल है और यह ग्लोबल ऑयल सप्लाई का बड़ा स्रोत है। कंपनी पूरी तरह सऊदी सरकार के स्वामित्व में है, जहां सऊदी अरब का पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड (PIF) प्रमुख शेयरधारक है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान कंपनी के रणनीतिक फैसलों में अहम भूमिका निभाते हैं। अरामको की वैल्यूएशन ट्रिलियन डॉलर से अधिक है और यह दुनिया के सबसे मूल्यवान ब्रांड्स में शुमार है।
मुकेश अंबानी और अरामको के बीच कनेक्शन काफी चर्चित रहा है। 2019 में मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी ऑयल टू केमिकल्स (O2C) बिजनेस में 20% स्टेक सऊदी अरामको को करीब 15 बिलियन डॉलर में बेचने की घोषणा की थी। इस डील के तहत अरामको रिलायंस के जामनगर रिफाइनरी को प्रतिदिन 5 लाख बैरल कच्चा तेल सप्लाई करने वाली थी। 2021 में बातचीत फिर तेज हुई और 20-25 बिलियन डॉलर की डील की खबरें आईं, लेकिन अंततः डील रद्द हो गई। रिलायंस ने नेट-जीरो कार्बन एमिशन 2035 तक का लक्ष्य रखते हुए अपनी दिशा बदली और ग्रीन एनर्जी पर फोकस किया।
फिर भी दोनों कंपनियों के बीच सहयोग की संभावनाएं बनी हुई हैं। रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी भारत की सबसे बड़ी है और अरामको के साथ पुरानी बातचीत से पता चलता है कि भारतीय ऊर्जा बाजार में सऊदी निवेश की रुचि बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व के मौजूदा संकट से ग्लोबल क्रूड प्राइस में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, जिसका असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ेगा।
मुख्य तथ्य तालिका:
रिफाइनरी: रास तनूरा (सऊदी अरामको की सबसे बड़ी)
क्षमता: 550,000 बैरल प्रतिदिन
हमला: ईरान से जुड़े ड्रोन (दो ड्रोन इंटरसेप्ट)
नुकसान: सीमित आग, कोई हताहत नहीं; रिफाइनरी बंद
अरामको का मालिक: सऊदी अरब सरकार (PIF प्रमुख शेयरधारक)
रिलायंस-अरामको कनेक्शन: 20% स्टेक डील 2019-2021 में प्रस्तावित, बाद में रद्द; कच्चे तेल सप्लाई की बात
वैश्विक प्रभाव: ऑयल प्राइस में तेजी, गल्फ एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खतरा
यह घटना मध्य पूर्व युद्ध के विस्तार को दिखाती है, जहां ऊर्जा सुविधाएं अब सीधे निशाने पर हैं। सऊदी अरब ने संकेत दिए हैं कि ईरान की ओर से बड़े हमले पर जवाबी कार्रवाई हो सकती है, जिसमें ईरानी ऑयल सुविधाओं को टारगेट किया जा सकता है।
Disclaimer: यह एक न्यूज रिपोर्ट है। जानकारी उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है और इसमें कोई व्यक्तिगत राय शामिल नहीं है।






