“बजट 2026 में आईटीआर फाइलिंग की डेडलाइन बढ़ाई गई, लेट फीस में राहत, टीडीएस-टीसीएस दरों में बदलाव और नए सेक्शन के तहत टैक्स छूट। आम टैक्सपेयर्स के लिए ये बदलाव आयकर रिटर्न, स्रोत पर कटौती और संग्रह को प्रभावित करेंगे, जिससे फाइनेंशियल प्लानिंग आसान होगी।”
ITR फाइलिंग की नई डेडलाइन क्या है? बजट 2026 में आईटीआर फाइलिंग की डेडलाइन को 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया गया है। यह बदलाव आम टैक्सपेयर्स को अतिरिक्त समय देगा, खासकर उन लोगों को जो वित्तीय वर्ष के अंत में दस्तावेज जुटाने में देरी का सामना करते हैं। इससे पहले, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई थी, लेकिन अब यह सभी श्रेणियों के टैक्सपेयर्स पर लागू होगी, जिसमें व्यक्तिगत और छोटे व्यवसाय शामिल हैं।
लेट फीस में क्या बदलाव आया है? लेट फीस को कम करके 5,000 रुपये से घटाकर 3,000 रुपये कर दिया गया है, लेकिन यह केवल 5 लाख रुपये से कम आय वाले टैक्सपेयर्स के लिए है। यदि आय 5 लाख से अधिक है, तो फीस 10,000 रुपये बनी रहेगी। यह राहत कम आय वर्ग को लक्षित करती है, जहां देरी से फाइलिंग के मामले ज्यादा देखे जाते हैं। पहले की तुलना में, यह 40% की कमी है, जो महंगाई को ध्यान में रखते हुए लागू की गई।
TDS दरों में क्या संशोधन हुआ? टीडीएस दरों को रेशनलाइज किया गया है, जिसमें किराए पर टीडीएस 10% से घटाकर 5% कर दिया गया है, लेकिन यह केवल 50,000 रुपये मासिक से ऊपर के किराए पर लागू होगा। प्रोफेशनल फीस पर टीडीएस 10% बना रहेगा, लेकिन नए सेक्शन के तहत ई-कॉमर्स ट्रांजेक्शन पर 1% टीडीएस जोड़ा गया है। यह बदलाव डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा और अनुपालन को आसान बनाएगा।
TCS में क्या नया है? टीसीएस अब विदेशी यात्रा पर 20% से घटाकर 10% कर दिया गया है, लेकिन LRS (Liberalised Remittance Scheme) के तहत 7 लाख रुपये से ऊपर की रेमिटेंस पर। कार खरीद पर टीसीएस 1% से बढ़ाकर 2% किया गया है, जो लग्जरी वाहनों को लक्षित करता है। यह बदलाव पर्यावरण अनुकूल वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए है, जहां इलेक्ट्रिक वाहनों पर टीसीएस छूट दी गई है।
नए ITR फॉर्म में क्या बदलाव हैं? ITR-1 और ITR-2 फॉर्म में नए सेक्शन जोड़े गए हैं, जहां क्रिप्टोकरेंसी आय को अलग से रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा। पहले यह कैपिटल गेन के तहत आता था, लेकिन अब स्पष्ट डिस्क्लोजर जरूरी है। इससे टैक्स विभाग को ट्रैकिंग आसान होगी और टैक्सपेयर्स को स्पष्ट दिशानिर्देश मिलेंगे।
टैक्स छूट की सीमा में क्या परिवर्तन है? सेक्शन 80C के तहत छूट सीमा 1.5 लाख से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है, जिसमें PPF, ELSS और NPS शामिल हैं। यह बदलाव मध्य वर्ग को बचत के लिए प्रोत्साहित करेगा, खासकर बढ़ती महंगाई में। सेक्शन 80D के तहत मेडिकल इंश्योरेंस छूट 25,000 से 50,000 रुपये हो गई है।
| सेक्शन | पुरानी छूट | नई छूट | प्रभावित क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| 80C | 1.5 लाख | 2 लाख | निवेश और बचत |
| 80D | 25,000 | 50,000 | स्वास्थ्य बीमा |
| 80E | कोई सीमा नहीं | 1 लाख | शिक्षा लोन |
क्रिप्टोकरेंसी पर TDS-TCS कैसे प्रभावित होगा? क्रिप्टो एक्सचेंज पर 1% TDS लागू रहेगा, लेकिन अब 10,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजेक्शन पर। TCS विदेशी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर 5% जोड़ा गया है, जो भारतीय निवेशकों को घरेलू प्लेटफॉर्म की ओर आकर्षित करेगा। यह बदलाव VDA (Virtual Digital Assets) को रेगुलेट करने के लिए है।
सलारीड क्लास के लिए क्या राहत है? स्टैंडर्ड डिडक्शन को 50,000 से बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है, जो सभी सैलरीड टैक्सपेयर्स पर लागू होगा। HRA छूट में शहर-आधारित संशोधन किया गया है, जहां मेट्रो शहरों में 50% तक छूट रहेगी, लेकिन नॉन-मेट्रो में 40%।
फ्रीलांसर्स के लिए TDS बदलाव क्या हैं? फ्रीलांस पेमेंट पर TDS 10% से घटाकर 5% किया गया है, लेकिन सालाना 20 लाख से ऊपर की आय पर। Upwork या Fiverr जैसे प्लेटफॉर्म से आय पर नए रिपोर्टिंग नियम लागू होंगे, जहां TDS ऑटोमेटिक कटेगा।
पेंशनर्स के लिए क्या नया है? पेंशन आय पर TDS थ्रेशोल्ड 2.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दिया गया है। NPS विड्रॉल पर टीसीएस छूट दी गई है, जो रिटायरमेंट प्लानिंग को मजबूत बनाएगा।
नए टैक्स रिजीम में क्या अपडेट है? नए रिजीम में स्लैब रेट्स अपरिवर्तित रहेंगे, लेकिन 7 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं। पुराने रिजीम में छूट विकल्प बढ़ाए गए हैं, जहां टैक्सपेयर्स स्विच कर सकते हैं।
| आय स्लैब (नया रिजीम) | टैक्स रेट |
|---|---|
| 0-3 लाख | 0% |
| 3-7 लाख | 5% |
| 7-10 लाख | 10% |
| 10-12 लाख | 15% |
| 12-15 लाख | 20% |
| 15 लाख से ऊपर | 30% |
फॉरेन इनकम पर TCS कैसे बदला? विदेशी आय पर TCS 5% से बढ़ाकर 10% किया गया है, लेकिन शिक्षा या मेडिकल के लिए छूट रहेगी। यह LRS के तहत लागू होगा, जो कैपिटल फ्लो को कंट्रोल करेगा।
MSME के लिए TDS राहत क्या है? MSME पेमेंट पर TDS 1% से घटाकर 0.5% किया गया है, जो कैश फ्लो सुधारने के लिए है। नए स्टार्टअप्स को TDS छूट मिलेगी, यदि रजिस्टर्ड हैं।
टैक्स ऑडिट थ्रेशोल्ड में बदलाव? टैक्स ऑडिट की सीमा 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी गई है, जो छोटे व्यवसायों को राहत देगी। डिजिटल ट्रांजेक्शन पर 95% होने पर अतिरिक्त छूट।
अनुपालन के लिए नई सुविधाएं क्या हैं? ITR फाइलिंग के लिए AI-बेस्ड चैटबॉट लॉन्च किया गया है, जो रियल-टाइम गाइडेंस देगा। TDS-TCS सर्टिफिकेट अब e-filing पोर्टल पर ऑटो-जनरेट होंगे, जिससे पेपरवर्क कम होगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख समाचार रिपोर्टों, विशेषज्ञ विश्लेषण और टैक्स टिप्स पर आधारित है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले पेशेवर सलाह लें।






