ATM से नहीं निकला कैश लेकिन खाते से कट गए पैसे? इस ग्राहक ने बैंक से ऐसे वसूला दोगुना हर्जाना

By Ravi Singh

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एटीएम मशीन से कैश न निकलने पर ग्राहक को मिला दोगुना हर्जाना, बैंकिंग फ्रॉड और उपभोक्ता अधिकार
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नागपुर के एक ग्राहक को एटीएम फेल ट्रांजेक्शन में 5,000 रुपये वापस मिले और अतिरिक्त 10,000 रुपये मुआवजा, कुल दोगुना से ज्यादा राशि। उपभोक्ता आयोग ने Axis Bank को दोषी ठहराया। RBI नियमों के तहत फेल ट्रांजेक्शन पर 5 दिनों में रिफंड अनिवार्य, देरी पर ₹100 प्रतिदिन हर्जाना।

ATM फेल ट्रांजेक्शन में ग्राहक को मिला दोगुना हर्जाना: नागपुर केस से सीखें अपने अधिकार

नागपुर में एक ग्राहक के साथ आठ साल पहले एटीएम से पैसे निकालने की कोशिश में गड़बड़ी हुई। उन्होंने 5,000 रुपये निकालने की कोशिश की, लेकिन मशीन से कैश नहीं निकला। हालांकि, उनके मोबाइल पर तुरंत मैसेज आ गया कि खाते से राशि डेबिट हो गई है। ग्राहक ने बैंक से शिकायत की, लेकिन लंबे समय तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिला। मामला नागपुर के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग तक पहुंचा।

आयोग ने जांच के बाद Axis Bank को दोषी पाया। बैंक को आदेश दिया गया कि ग्राहक के खाते से कटे 5,000 रुपये तुरंत वापस किए जाएं। इसके अलावा, मानसिक परेशानी और सेवा में कमी के लिए अतिरिक्त 10,000 रुपये मुआवजा दिया जाए। कुल मिलाकर ग्राहक को मूल राशि से दोगुने से ज्यादा लाभ हुआ। यह फैसला हाल ही में आया है और उपभोक्ता अधिकारों की मजबूती को दर्शाता है।

RBI के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, जब एटीएम से कैश नहीं निकलता लेकिन खाते से पैसे कट जाते हैं, तो इसे फेल ट्रांजेक्शन माना जाता है। बैंक को ट्रांजेक्शन की तारीख से अधिकतम 5 कैलेंडर दिनों (T+5) के भीतर राशि स्वतः वापस क्रेडिट करनी होती है। यह प्रक्रिया प्रो-एक्टिव होती है, यानी ग्राहक को बार-बार फॉलो-अप करने की जरूरत नहीं पड़ती।

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यदि बैंक 5 दिनों के बाद भी रिफंड नहीं करता, तो छठे दिन से प्रतिदिन 100 रुपये का हर्जाना ग्राहक के खाते में जमा किया जाता है। यह हर्जाना तब तक चलता है जब तक राशि क्रेडिट नहीं हो जाती। कई मामलों में देरी के कारण हर्जाना मूल राशि से ज्यादा हो जाता है, जिससे ग्राहक को फायदा होता है।

ऐसे मामलों में ग्राहक क्या करें:

सबसे पहले एटीएम से मिली स्लिप जरूर संभालें। इसमें ट्रांजेक्शन आईडी, समय, मशीन कोड और अन्य डिटेल्स होती हैं।

अगर स्लिप नहीं मिली, तो बैंक स्टेटमेंट या मोबाइल ऐप से ट्रांजेक्शन डिटेल्स निकालें।

24-48 घंटे के अंदर बैंक के कस्टमर केयर, मोबाइल ऐप, नेट बैंकिंग या ब्रांच में शिकायत दर्ज करें। रेफरेंस नंबर अवश्य लें।

यदि 5 दिनों में रिफंड नहीं मिले, तो दोबारा फॉलो-अप करें और हर्जाने की मांग करें।

यदि बैंक नहीं मानता, तो RBI की CMS पोर्टल (cms.rbi.org.in) पर ऑनलाइन शिकायत करें या जिला उपभोक्ता आयोग में केस दायर करें।

नागपुर केस में ग्राहक ने लंबी लड़ाई लड़ी और आयोग ने बैंक की सेवा में कमी मानी। इसी तरह अन्य शहरों में भी कई फैसले आए हैं जहां बैंक को रिफंड के साथ ब्याज और मुआवजा देना पड़ा है। उदाहरण के लिए, कुछ मामलों में 9% ब्याज के साथ हजारों रुपये अतिरिक्त दिए गए हैं।

यह समस्या आम है क्योंकि एटीएम में कैश की कमी, तकनीकी खराबी, नेटवर्क इश्यू या टाइमआउट जैसी वजहें होती हैं। RBI के नियम ग्राहकों को मजबूत सुरक्षा देते हैं। हर साल लाखों फेल ट्रांजेक्शन होते हैं, लेकिन जागरूक ग्राहक ही हर्जाना वसूल पाते हैं।

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ग्राहकों के लिए मुख्य टिप्स (तालिका)

क्रमांककदमसमय सीमासंभावित लाभ
1एटीएम स्लिप/डिटेल्स संभालेंतुरंतसबूत के रूप में उपयोगी
2बैंक में शिकायत दर्ज करें24-48 घंटेरेफरेंस नंबर मिलेगा
3रिफंड की प्रतीक्षा करेंअधिकतम 5 दिनस्वतः क्रेडिट होना चाहिए
4देरी पर हर्जाना मांगें6वें दिन से₹100 प्रतिदिन
5RBI CMS या उपभोक्ता आयोगयदि बैंक न मानेअतिरिक्त मुआवजा संभव

यह केस दर्शाता है कि बैंकिंग सेवाओं में गड़बड़ी होने पर ग्राहक चुप नहीं रहें। उचित कदम उठाकर न केवल अपना पैसा वापस पाएं, बल्कि हर्जाना भी वसूलें।

Disclaimer: यह एक न्यूज रिपोर्ट है। इसमें दी गई जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नियमों और केस पर आधारित है। व्यक्तिगत मामलों में कानूनी सलाह लें।

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Ravi Singh

मेरा नाम रवि सिंह है, मैं एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करता हूँ और मुझे लेख लिखना बहुत पसंद है। 4 साल के ब्लॉगिंग अनुभव के साथ मैं हमेशा दूसरों को प्रेरित करने और उन्हें सफल ब्लॉगर बनाने के लिए ज्ञान साझा करने के लिए तैयार रहता हूँ।

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