“प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ने 2016 से अब तक 78.41 करोड़ से अधिक किसान आवेदनों को कवर किया है, जिसमें 22.67 करोड़ से ज्यादा किसानों को कुल 1.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक के क्लेम का भुगतान मिल चुका है। यह योजना किसानों की आय स्थिर करने, प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा प्रदान करने और कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, हालांकि क्लेम निपटान में देरी और कुछ राज्यों में चुनौतियां बनी हुई हैं।”
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के 10 साल: उपलब्धियां और प्रभाव
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) की शुरुआत 18 फरवरी 2016 को हुई थी। यह योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, कीटों, रोगों और अन्य गैर-रोकथाम योग्य जोखिमों से फसल नुकसान पर वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। योजना के तहत खरीफ फसलों के लिए प्रीमियम 2%, रबी के लिए 1.5% और वाणिज्यिक/बागवानी फसलों के लिए 5% तय है, बाकी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकारें वहन करती हैं।
मुख्य आंकड़े और उपलब्धियां
कुल बीमित किसान आवेदन : 2016 से 2024-25 (30 जून 2025 तक) 78.41 करोड़ आवेदन बीमित हुए।
क्लेम प्राप्त करने वाले किसान : 22.67 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिला।
कुल क्लेम भुगतान : 1.83 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर।
किसान नामांकन में वृद्धि : 2022-23 में 3.17 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 4.19 करोड़ पहुंचा, यानी 32% की बढ़ोतरी।
नॉन-लोनी किसानों की भागीदारी : 2014-15 में 20 लाख से बढ़कर 2024-25 में 5.22 करोड़, जो योजना की स्वैच्छिक स्वीकार्यता दर्शाता है।
ये आंकड़े योजना की व्यापक पहुंच और किसानों के बीच बढ़ते विश्वास को दिखाते हैं। हर 100 रुपये के किसान प्रीमियम पर औसतन 500 रुपये से अधिक क्लेम मिला है, जो फसल नुकसान की भरपाई में सहायक साबित हुआ।
कृषि कारोबार पर प्रभाव
योजना ने कृषि क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन को मजबूत किया है। फसल नुकसान पर तत्काल वित्तीय सहायता से किसान अगली फसल के लिए निवेश कर पाते हैं, जिससे उत्पादकता और फसल विविधीकरण बढ़ा है।
आय स्थिरता : प्राकृतिक आपदाओं (सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि) के दौरान किसानों की आय में गिरावट कम हुई, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ा।
क्रेडिट फ्लो : बीमा कवरेज से बैंक कृषि ऋण देने में अधिक आश्वस्त हुए, क्योंकि जोखिम कम हुआ।
आधुनिक तकनीक का उपयोग : YES-TECH (रिमोट सेंसिंग आधारित यील्ड अनुमान), WINDS (मौसम डेटा नेटवर्क), CCE-Agri App और National Crop Insurance Portal (NCIP) से क्लेम प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हुई।
डिजिटल क्लेम : DigiClaim मॉड्यूल से Kharif 2022 से क्लेम सीधे किसान खाते में ट्रांसफर हो रहे हैं।
हालांकि, कुछ चुनौतियां भी रहीं। क्लेम निपटान में देरी (कभी-कभी महीनों तक), यील्ड डेटा विवाद और राज्य सरकारों की सब्सिडी में विलंब से किसानों में असंतोष देखा गया। 2025-26 बजट में आवंटन में कटौती से योजना की निरंतरता पर सवाल उठे, लेकिन केंद्र ने 12% पेनल्टी प्रावधान और ट्रैंच-बेस्ड सेटलमेंट जैसे सुधार किए।
राज्यों में प्रभाव
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसे बड़े कृषि राज्य योजना के प्रमुख लाभार्थी रहे। इन राज्यों में बड़े पैमाने पर क्लेम भुगतान से किसानों ने फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि अपनाई। गैर-लोनी किसानों की बढ़ती संख्या से योजना अब केवल ऋण लेने वालों तक सीमित नहीं रही।
भविष्य की दिशा
योजना को और प्रभावी बनाने के लिए Kharif 2026 से नई गाइडलाइंस लागू हो रही हैं, जिसमें क्लेम सेटलमेंट टाइमलाइन सख्त और तकनीकी मूल्यांकन बढ़ाया जाएगा। यह किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में सहायक बनेगी।






