देश में UPI का जबरदस्त ट्रेंड भी कैश के चलन को रोक नहीं पाया, करेंसी इन सर्कुलेशन रिकॉर्ड 40 लाख करोड़ रुपये पहुंचा

By Ravi Singh

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भारत में कैश और UPI के आंकड़े दिखाते ग्राफ, 40 लाख करोड़ करेंसी सर्कुलेशन और 28 लाख करोड़ UPI वैल्यू
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देश में डिजिटल पेमेंट्स के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बावजूद कैश का चलन बढ़ता जा रहा है। जनवरी 2026 के अंत तक करेंसी इन सर्कुलेशन (CiC) करीब 40 लाख करोड़ रुपये के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया है, जिसमें सालाना 11.1% की तेज वृद्धि दर्ज हुई। एक महीने में UPI से 28.33 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन हुए, जो कुल कैश स्टॉक का लगभग 70% है, लेकिन ग्रामीण-शहरी खपत, कम ब्याज दरें और अन्य कारक कैश डिमांड को बढ़ावा दे रहे हैं।

UPI का ट्रेंड भी नहीं रोक पाया कैश ट्रांजैक्शन में तेजी, सर्कुलेशन 40 लाख करोड़ रुपए पहुंचा

भारत में UPI ने जनवरी 2026 में नया रिकॉर्ड बनाया है, जहां कुल 21.70 अरब (21703.44 मिलियन) लेनदेन हुए, जिनकी वैल्यू 28.33 लाख करोड़ रुपये रही। यह दिसंबर 2025 के 27.97 लाख करोड़ रुपये से 1.3% अधिक है और पिछले साल की समान अवधि से 21% की वृद्धि दर्शाता है। औसतन प्रतिदिन 70 करोड़ लेनदेन और 91,403 करोड़ रुपये की वैल्यू हो रही है।

NPCI के आंकड़ों से पता चलता है कि UPI अब छोटे लेनदेन में हावी है, जहां व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) ट्रांजेक्शन में 86% से अधिक 500 रुपये से कम मूल्य के हैं। इससे साफ है कि डिजिटल पेमेंट्स छोटे नोटों और रोजमर्रा के कैश यूज को रिप्लेस कर रहे हैं। फिर भी कुल करेंसी इन सर्कुलेशन में उछाल आया है।

Reserve Bank of India के हालिया आंकड़ों और SBI Research की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 के अंत तक CiC करीब 40 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 11.1% अधिक है (पिछले साल 5.3% वृद्धि थी)। जनता के पास मौजूद करेंसी (Currency with Public) करीब 39 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें 11.5% YoY ग्रोथ हुई। वित्त वर्ष की शुरुआत से अब तक CiC में 2.76 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई, जो पिछले साल की समान अवधि से तीन गुना अधिक है।

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कैश डिमांड बढ़ने के प्रमुख कारण:

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में खपत में तेजी।

कम ब्याज दरों से लोगों, खासकर ग्रामीण इलाकों में, ज्यादा खर्च करने की प्रवृत्ति।

शहरी क्षेत्रों में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष टैक्स कटौती से डिस्पोजेबल इनकम बढ़ना।

कुछ राज्यों में छोटे व्यापारियों पर GST नोटिस से ATM से ज्यादा निकासी।

सोने-चांदी की कीमतों में उछाल से घरेलू स्तर पर रिसाइक्लिंग, जिससे कैश डिमांड प्रभावित।

2000 रुपये नोटों की जगह नए नोटों का आना।

हालांकि कैश-टू-जीडीपी अनुपात FY26 में घटकर 11% रह गया है (FY21 में 14.4% था), जो दर्शाता है कि इकोनॉमी की ग्रोथ अब कैश से कम और UPI जैसे डिजिटल माध्यमों से ज्यादा फाइनेंस हो रही है। UPI और कैश के बीच इनवर्स रिलेशनशिप बनी हुई है – ज्यादा डिजिटल लेनदेन से कुछ सेगमेंट में कैश यूज घटा है, लेकिन कुल इकोनॉमिक एक्टिविटी और कंजम्पशन ग्रोथ से कैश डिमांड ऊंची बनी हुई है।

UPI की ग्रोथ से डिजिटल इकोनॉमी मजबूत हुई है, लेकिन कैश अभी भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था, अनौपचारिक सेक्टर और बड़े मूल्य के ट्रांजेक्शन में मजबूत स्थिति में है। दोनों सिस्टम एक साथ चल रहे हैं, जहां डिजिटल छोटे पेमेंट्स पर कब्जा कर रहा है और कैश बड़े या ट्रस्ट-बेस्ड लेनदेन में बरकरार है।

Disclaimer: यह खबर विभिन्न सार्वजनिक रिपोर्ट्स और आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है। निवेश या वित्तीय निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।

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Ravi Singh

मेरा नाम रवि सिंह है, मैं एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करता हूँ और मुझे लेख लिखना बहुत पसंद है। 4 साल के ब्लॉगिंग अनुभव के साथ मैं हमेशा दूसरों को प्रेरित करने और उन्हें सफल ब्लॉगर बनाने के लिए ज्ञान साझा करने के लिए तैयार रहता हूँ।

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