“भारतीय IPO बाजार में गिरावट का ट्रेंड जारी, Fractal Analytics ने इश्यू साइज 42% घटाकर 2,834 करोड़ रुपये किया, Aye Finance ने भी मूल प्रस्ताव से कटौती कर 1,010 करोड़ रुपये पर सेटल। बाजार की अस्थिरता, कम वैल्यूएशन और निवेशक सेंटिमेंट कमजोर होने से कंपनियां सतर्क, क्या यह बड़ा खतरा संकेत है?”
IPO साइज में क्यों आ रही है गिरावट, आने वाली दो कंपनियों ने घटाया इश्यू साइज; क्या कोई खतरा है?
भारतीय शेयर बाजार में IPO के साइज में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जहां कंपनियां अपने मूल प्रस्ताव से कटौती कर रही हैं। Fractal Analytics, जो AI आधारित एंटरप्राइज सॉल्यूशन प्रोवाइडर है, ने अपना IPO साइज 4,900 करोड़ रुपये से घटाकर 2,834 करोड़ रुपये कर दिया है। यह 42% की बड़ी कटौती है, जिसमें फ्रेश इश्यू 1,023 करोड़ रुपये और ऑफर फॉर सेल 1,810 करोड़ रुपये शामिल है। कंपनी का प्राइस बैंड 857-900 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, जो पहले के वैल्यूएशन से कम है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला हाल की मार्केट करेक्शन और निवेशकों की सतर्कता के कारण लिया गया है।
दूसरी ओर, Aye Finance, जो माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में काम करती है, ने भी अपना इश्यू साइज मूल 2,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव से घटाकर 1,010 करोड़ रुपये कर दिया है। यह कटौती मुख्य रूप से बाजार की अस्थिरता और कम सब्सक्रिप्शन की आशंका के चलते की गई है। कंपनी का प्राइस बैंड 122-129 रुपये प्रति शेयर है, और यह BSE तथा NSE पर लिस्टिंग की तैयारी में है। दोनों कंपनियां फरवरी में ही अपना इश्यू ओपन करने वाली हैं, जहां Fractal का बिडिंग 9 से 11 फरवरी तक और Aye का भी इसी दौरान चलेगा।
यह ट्रेंड 2026 की शुरुआत से ही दिख रहा है, जहां जनवरी में केवल तीन IPO लॉन्च हुए—Bharat Coking Coal, Amagi Media Labs और Shadowfax Technologies—जिन्होंने कुल 4,765 करोड़ रुपये जुटाए। यह 2025 के रिकॉर्ड 1.76 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले काफी कम है। बाजार में गिरावट के कारण कंपनियां या तो IPO पोस्टपोन कर रही हैं या साइज घटा रही हैं। SEBI के नियमों के तहत इश्यू साइज में बड़ी कटौती सीमित है, लेकिन वैल्यूएशन एडजस्टमेंट जरूरी हो गया है।
प्रमुख कारण IPO साइज में गिरावट के
बाजार अस्थिरता : सेंसेक्स और निफ्टी में हाल की गिरावट ने निवेशकों को सतर्क बनाया है। जनवरी में मार्केट करेक्शन ने कई IPO को प्रभावित किया, जहां लिस्टिंग के बाद शेयर प्राइस नीचे गिरे।
कम वैल्यूएशन : कंपनियां पहले के फंडिंग राउंड से कम वैल्यूएशन पर IPO ला रही हैं। Fractal का वैल्यूएशन 14,450 करोड़ रुपये तय हुआ, जो पिछले राउंड से कम है।
निवेशक सेंटिमेंट : रिटेल और इंस्टीट्यूशनल निवेशक अब प्रॉफिटेबिलिटी पर फोकस कर रहे हैं। 2025 के कई IPO जैसे Ola Electric और Swiggy लिस्टिंग के बाद 10-50% नीचे ट्रेड कर रहे हैं।
रेगुलेटरी प्रेशर : SEBI के सख्त नियमों से कंपनियां बड़े साइज से बच रही हैं, ताकि सब्सक्रिप्शन सुनिश्चित हो।
ग्लोबल फैक्टर : US ट्रेड डील ऑप्टिमिज्म के बावजूद, इंफ्लेशन और जियो-पॉलिटिकल टेंशन ने भारतीय मार्केट को प्रभावित किया।
| कंपनी | मूल इश्यू साइज (करोड़ रुपये) | घटाया हुआ साइज (करोड़ रुपये) | कटौती प्रतिशत | लिस्टिंग डेट |
|---|---|---|---|---|
| Fractal Analytics | 4,900 | 2,834 | 42% | 16 फरवरी 2026 |
| Aye Finance | 2,000 | 1,010 | 49.5% | 13 फरवरी 2026 |
| Shadowfax (हाल का उदाहरण) | 3,000 (अनुमानित) | 2,500 (समायोजित) | 16.7% | 28 जनवरी 2026 |
यह टेबल दिखाती है कि साइज कटौती अब सामान्य हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मार्केट स्टेबल नहीं हुआ, तो आने वाले IPO जैसे Indo MIM (5,500 करोड़) और Clean Max (3,600 करोड़) भी एडजस्टमेंट कर सकते हैं।
क्या निवेशकों के लिए खतरा है?
IPO साइज में गिरावट से निवेशकों को सिग्नल मिल रहा है कि बाजार में रिस्क बढ़ा है। कम साइज का मतलब है कंपनी कम कैपिटल जुटा रही है, जो ग्रोथ प्लान को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, यह सकारात्मक भी है क्योंकि वैल्यूएशन रियलिस्टिक हो रहा है, जिससे लॉन्ग-टर्म में स्टेबिलिटी मिल सकती है। रिटेल निवेशकों को सलाह है कि सब्सक्रिप्शन से पहले कंपनी की फाइनेंशियल्स चेक करें, जैसे Fractal का FY25 रेवेन्यू 2,765 करोड़ रुपये और Aye का माइक्रोफाइनेंस फोकस।
अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो 2026 में कुल IPO फंडरेजिंग 1 लाख करोड़ से कम रह सकती है, जबकि पाइपलाइन में 200+ कंपनियां हैं। NSE का खुद का IPO (23,000 करोड़ अनुमानित) भी इस साल आ सकता है, लेकिन मार्केट कंडीशन पर निर्भर। कंपनियां अब प्रॉफिट पाथ पर फोकस कर रही हैं, यूजर एक्विजिशन से ज्यादा।
सुझाव निवेशकों के लिए
वैल्यूएशन रेशियो चेक करें: PE रेशियो 20-30 के बीच हो।
सेक्टर ट्रेंड देखें: AI और फिनटेक में ग्रोथ है, लेकिन रिस्क हाई।
डाइवर्सिफाई करें: एक IPO में पूरा कैपिटल न लगाएं।
मार्केट इंडिकेटर मॉनिटर: VIX इंडेक्स अगर 20 से ऊपर, तो सतर्क रहें।
लॉन्ग-टर्म होल्ड: शॉर्ट-टर्म गेन की बजाय फंडामेंटल्स पर फोकस।
यह बदलाव भारतीय कैपिटल मार्केट की मैच्योरिटी दिखाता है, जहां हाइप से ज्यादा रियल वैल्यू मायने रखती है। आने वाले महीनों में Zepto (11,682 करोड़) और OYO (6,650 करोड़) जैसे IPO भी इसी ट्रेंड का सामना कर सकते हैं।
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