“अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी पर सिक्योरिटीज फ्रॉड के आरोप लगाए हैं, जिसके बाद 14 महीनों की देरी से अदाणी पक्ष ने अमेरिकी कोर्ट में पहली फाइलिंग की है। SEC अब फेडरल कोर्ट से डायरेक्ट समन सर्व करने की अनुमति मांग रही है, जबकि अदाणी ग्रुप ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है और कानूनी लड़ाई की तैयारी कर ली है। मार्केट में अदाणी कंपनियों के शेयर्स में भारी गिरावट आई है, जिससे 12.5 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।”
अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी पर सिक्योरिटीज फ्रॉड और ब्राइबरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। ये आरोप 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड इश्यू से जुड़े हैं, जहां कथित रूप से निवेशकों को गुमराह किया गया। SEC का दावा है कि अदाणी ने सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स में ब्राइब देकर कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल किए और फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में अनियमितताएं बरतीं।
अदाणी पक्ष ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि ये बेबुनियाद हैं और कोई कंपनी इसमें पार्टी नहीं है। सागर अदाणी ने Hecker Fink LLP फर्म को हायर किया है, जबकि गौतम अदाणी ने Kirkland & Ellis LLP और Quinn Emanuel Urquhart & Sullivan LLP जैसी प्रमुख लॉ फर्म्स की सेवाएं ली हैं। ये फर्म्स अमेरिकी कोर्ट में नेगोशिएशन की कोशिश कर रही हैं, जिससे संकेत मिलता है कि अदाणी अब समन को एक्सेप्ट करने और केस लड़ने को तैयार हैं।
SEC ने पिछले 14 महीनों में हेग कन्वेंशन के तहत भारत सरकार से समन सर्व करने की अपील की थी, लेकिन लॉ मिनिस्ट्री ने दो बार इसे रिजेक्ट कर दिया क्योंकि डॉक्यूमेंट्स में इंक सिग्नेचर और ऑफिशियल सील की कमी थी। अब SEC ने ब्रुकलिन की फेडरल कोर्ट से डायरेक्ट ईमेल या पर्सनल सर्विस की अनुमति मांगी है, जो एक बड़ा ट्विस्ट है। अगर कोर्ट अनुमति देती है, तो अदाणी को अमेरिकी कानून के तहत जवाब देना पड़ेगा, जिसमें जुर्माना या अन्य पेनल्टीज शामिल हो सकती हैं।
मार्केट इम्पैक्ट पर नजर डालें तो अदाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयर्स में भारी गिरावट दर्ज हुई। Adani Enterprises के शेयर्स 14.54% गिरे, जबकि Adani Ports और Adani Green में 3.4% से 10% तक की कमी आई। कुल मिलाकर, ग्रुप की मार्केट कैप में 12.5 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ, जो भारतीय स्टॉक मार्केट पर दबाव डाल रहा है। निवेशक अब अदाणी के ग्लोबल एक्सपैंशन प्लान्स पर सवाल उठा रहे हैं, खासकर US और ऑस्ट्रेलिया में चल रहे प्रोजेक्ट्स पर।
केस की प्रमुख आरोप और डिफेंस पॉइंट्स
SEC के आरोप : अदाणी ने Azure Power ग्लोबल लिमिटेड के जरिए 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड्स इश्यू किए, लेकिन फाइनेंशियल डिस्क्लोजर्स में ब्राइबरी और कॉन्ट्रैक्ट मैनिपुलेशन छिपाया। SEC का कहना है कि इससे निवेशकों को 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ।
अदाणी का डिफेंस : ग्रुप ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग्स में स्पष्ट किया कि आरोप व्यक्तिगत हैं, कंपनी पर नहीं। वे कानूनी रेमेडीज की तलाश कर रहे हैं और नेगोशिएशन के जरिए सेटलमेंट की कोशिश में हैं।
भारत सरकार की भूमिका : लॉ मिनिस्ट्री ने टेक्निकल ग्राउंड्स पर समन रिजेक्ट किए, जो डिप्लोमैटिक टेंशन बढ़ा रहा है। SEC अब हेग कन्वेंशन को बायपास करने की कोशिश में है।
संभावित परिणाम : अगर केस आगे बढ़ता है, तो अदाणी को अमेरिकी कोर्ट में गवाही देनी पड़ सकती है, जो उनके बिजनेस एम्पायर पर लंबे समय तक असर डालेगा।
टाइमलाइन ऑफ इवेंट्स
| तारीख/समयावधि | इवेंट |
|---|---|
| नवंबर 2024 | SEC ने गौतम और सागर अदाणी पर सिविल चार्जेस फाइल किए, फ्रॉड और ब्राइबरी के आरोप लगाए। |
| 2025 में | SEC ने हेग कन्वेंशन के तहत भारत से दो बार समन सर्व करने की रिक्वेस्ट की, लेकिन रिजेक्ट हुई। |
| जनवरी 2026 | अदाणी पक्ष ने अमेरिकी कोर्ट में पहली फाइलिंग की; SEC ने फेडरल कोर्ट से डायरेक्ट सर्विस की अनुमति मांगी। |
| जनवरी 2026 (ताजा) | अदाणी शेयर्स में 12.5 बिलियन डॉलर का मार्केट कैप नुकसान; ग्रुप ने आरोपों को बेबुनियाद बताया। |
यह केस अदाणी ग्रुप के लिए बड़ा चैलेंज है, क्योंकि यह उनके इंटरनेशनल फाइनेंसिंग और इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस पर असर डाल रहा है। Adani Green Energy जैसे सब्सिडियरीज पर फोकस बढ़ गया है, जहां ग्लोबल इन्वेस्टर्स ने अरबों डॉलर लगाए हैं। अगर नेगोशिएशन फेल होती है, तो केस ट्रायल तक जा सकता है, जिसमें नए डॉक्यूमेंट्स और विटनेस सामने आ सकते हैं।
मार्केट एनालिसिस और इम्प्लिकेशन्स
शॉर्ट-टर्म इफेक्ट्स : BSE पर अदाणी स्टॉक्स में वोलेटिलिटी बढ़ी है। Adani Total Gas में 8% की गिरावट देखी गई, जबकि Nifty इंडेक्स पर मामूली असर पड़ा।
लॉन्ग-टर्म रिस्क्स : अगर अमेरिकी कोर्ट में प्रतिकूल फैसला आता है, तो अदाणी के US बॉन्ड मार्केट एक्सेस पर बैन लग सकता है। ग्रुप के 100 बिलियन डॉलर के इन्वेस्टमेंट प्लान्स, जैसे हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स, प्रभावित हो सकते हैं।
इन्वेस्टर एडवाइज : एक्सपर्ट्स सुझाव दे रहे हैं कि रिटेल इन्वेस्टर्स अदाणी स्टॉक्स में शॉर्ट-सेलिंग से बचें और लॉन्ग-टर्म होल्डिंग पर फोकस करें, क्योंकि ग्रुप की डोमेस्टिक स्ट्रेंग्थ मजबूत है।
ग्लोबल कनेक्शन : यह केस Hindenburg रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसने 2023 में अदाणी शेयर्स को क्रैश कराया था। अब US DOJ भी इन्वेस्टीगेशन कर रहा है, जो ब्राइबरी एंगल को मजबूत कर रहा है।
अदाणी ग्रुप ने अपनी फाइलिंग में जोर दिया कि वे सभी रेगुलेटरी कंप्लायंस फॉलो करते हैं और अमेरिकी कोर्ट में मजबूत डिफेंस पेश करेंगे। SEC की मotion पर कोर्ट का फैसला आने वाला है, जो इस केस की दिशा तय करेगा। अगर समन सर्व हो जाता है, तो अदाणी को 21 दिनों में रिस्पॉन्स फाइल करना होगा, जिससे नए रिवीलेशन हो सकते हैं।
संभावित कानूनी स्ट्रैटजीज
अदाणी पक्ष नेगोशिएशन पर फोकस कर रहा है, जहां सेटलमेंट के जरिए जुर्माना देकर केस खत्म किया जा सकता है।
SEC के पास स्ट्रॉन्ग एविडेंस है, जैसे ईमेल्स और फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स, लेकिन अदाणी इसे चुनौती दे सकते हैं।
भारत में SEBI इन्वेस्टीगेशन चल रही है, जो US केस से लिंक्ड हो सकती है।
यह डेवलपमेंट अदाणी एम्पायर के लिए टेस्टिंग टाइम है, जहां वे अपनी रेपुटेशन बचाने की कोशिश में हैं। मार्केट वॉचर्स अब कोर्ट की अगली हियरिंग पर नजर रखे हुए हैं, जो जल्द ही हो सकती है।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट सूत्रों पर आधारित है।






