“भारत सरकार ने EVs के लिए AVAS सिस्टम अनिवार्य कर दिया है, जिससे कम स्पीड पर इंजन जैसी कृत्रिम ध्वनि निकलेगी। नए मॉडल्स के लिए 1 अक्टूबर 2026 से लागू, मौजूदा मॉडल्स को 2027 तक समय। ई-रिक्शा और ई-कार्ट्स भी शामिल, पैदल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने का लक्ष्य।”
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की बढ़ती संख्या के साथ सड़क सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में संशोधन कर Acoustic Vehicle Alerting System (AVAS) को अनिवार्य कर दिया है। यह सिस्टम EVs को कम स्पीड पर कृत्रिम ध्वनि उत्सर्जित करने की सुविधा देगा, जो पारंपरिक इंजन की आवाज जैसी होगी, ताकि पैदल यात्री, साइकिल सवार और नेत्रहीन व्यक्ति वाहन की उपस्थिति को महसूस कर सकें।
AVAS सिस्टम क्या है और कैसे काम करता है? AVAS एक सुरक्षा फीचर है जो EVs और हाइब्रिड वाहनों में लगाया जाता है। यह 20 किमी/घंटा से कम स्पीड पर स्वचालित रूप से सक्रिय हो जाता है और एक नियंत्रित, हल्की ध्वनि उत्पन्न करता है। ध्वनि की तीव्रता 56 से 75 डेसिबल के बीच होती है, जो पर्यावरण को प्रभावित किए बिना प्रभावी अलर्ट प्रदान करती है। कुछ मॉडल्स में यह ध्वनि इंजन की गर्जना जैसी डिजाइन की जाती है, जबकि अन्य में futuristic टोन इस्तेमाल होते हैं। AIS-173 मानकों के अनुसार, यह सिस्टम बैकअप मोड में भी काम करता है, जैसे रिवर्स गियर में।
यह नियम किन वाहनों पर लागू होगा? MoRTH ने M कैटेगरी (पैसेंजर वाहन जैसे कार्स, बसें) और N कैटेगरी (गुड्स वाहन जैसे ट्रक) के सभी इलेक्ट्रिफाइड वाहनों को शामिल किया है। हाल ही में L5 (ई-रिक्शा) और L7 (ई-कार्ट) कैटेगरी को भी जोड़ा गया है, जो शहरी क्षेत्रों में आम हैं।
| कैटेगरी | वाहन प्रकार | AVAS की आवश्यकता |
|---|---|---|
| M | पैसेंजर कार्स, बसें | कम स्पीड पर ध्वनि अलर्ट |
| N | गुड्स ट्रक, वैन | पैदल यात्री सुरक्षा के लिए |
| L5 | ई-रिक्शा | शहरी ट्रैफिक में अनिवार्य |
| L7 | ई-कार्ट | लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी के लिए |
समयसीमा और चरणबद्ध लागूकरण: नए मॉडल्स के लिए AVAS 1 अक्टूबर 2026 से अनिवार्य होगा, जबकि मौजूदा मॉडल्स को 1 अक्टूबर 2027 तक का समय दिया गया है। इससे वाहन निर्माताओं को मौजूदा उत्पादन लाइनों में बदलाव करने का अवसर मिलेगा। ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, 30 दिनों के भीतर सुझाव आमंत्रित किए गए हैं, जिससे अंतिम नियम में मामूली बदलाव संभव हैं।
क्यों जरूरी है यह नियम? भारत में EVs की बिक्री 2025 में 20 लाख यूनिट्स से अधिक पहुंच गई है, लेकिन उनकी साइलेंट नेचर के कारण दुर्घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा रिपोर्ट्स के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में पैदल यात्रियों से जुड़ी 15% दुर्घटनाएं EVs से संबंधित हैं, क्योंकि कम स्पीड पर वे सुनाई नहीं देते। AVAS से नेत्रहीन और बच्चों की सुरक्षा में 30% तक सुधार की उम्मीद है। वैश्विक स्तर पर EU और US में यह सिस्टम 2019 से लागू है, जहां दुर्घटना दर में 20% कमी आई है। भारत में दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में ट्रैफिक घनत्व अधिक होने से यह और भी महत्वपूर्ण है।
वाहन निर्माताओं पर प्रभाव: Tata Motors, Mahindra, Hyundai जैसी कंपनियां पहले से कुछ मॉडल्स में AVAS इंटीग्रेट कर रही हैं, लेकिन अब सभी को अनुपालन करना होगा। लागत में 5,000 से 10,000 रुपये की वृद्धि संभव है, जो EV की कुल कीमत का 1-2% है। स्टार्टअप्स जैसे Ather Energy और Ola Electric को ई-स्कूटर्स में समान फीचर जोड़ने की चुनौती मिलेगी, हालांकि नियम मुख्य रूप से फोर-व्हीलर्स पर केंद्रित है।
सुरक्षा लाभों की मुख्य बातें:
पैदल यात्री अलर्ट: 20 किमी/घंटा से नीचे ध्वनि सक्रिय, जो रिवर्स में दोगुनी तीव्रता वाली होती है।
पर्यावरण अनुकूल: ध्वनि न्यूनतम स्तर पर, शोर प्रदूषण नहीं बढ़ाती।
तकनीकी एकीकरण: स्पीकर्स और सॉफ्टवेयर से जुड़ा, जो बैटरी पर न्यूनतम प्रभाव डालता है (0.5% से कम)।
वैश्विक अनुपालन: AIS-173 UN ECE R138 से प्रेरित, जो अंतरराष्ट्रीय निर्यात में मदद करेगा।
शहरी फोकस: ई-रिक्शा जैसे वाहनों से बाजारों में सुरक्षा बढ़ेगी, जहां पैदल यात्री अधिक हैं।
उपभोक्ताओं के लिए फायदे: ड्राइवरों को कानूनी अनुपालन की चिंता नहीं रहेगी, और परिवारों के लिए सुरक्षा बढ़ेगी। कुछ EVs में कस्टमाइजेबल साउंड ऑप्शन्स आ सकते हैं, जैसे स्पोर्टी इंजन टोन या सॉफ्ट व्हिसल। हालांकि, उच्च स्पीड पर सिस्टम बंद हो जाता है, क्योंकि टायर और एयर नॉइज पर्याप्त होता है।
चुनौतियां और समाधान: निर्माताओं को सप्लाई चेन में स्पीकर्स और सेंसर जोड़ने होंगे, जिससे प्रोडक्शन में 3-6 महीने का समय लग सकता है। सरकार ने ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स कमिटी के साथ मिलकर टेस्टिंग प्रक्रिया सरल की है। भविष्य में V2V (Vehicle-to-Vehicle) तकनीक के साथ AVAS को इंटीग्रेट करने की योजना है, जो 2026 के अंत तक रोलआउट हो सकती है।
यह नियम EV एडॉप्शन को बढ़ावा देगा, क्योंकि सुरक्षा चिंताएं कम होंगी। 2025 में EV मार्केट 15% ग्रोथ दिखा रहा है, और AVAS से यह 20% तक पहुंच सकता है। शहरी लॉजिस्टिक्स में ई-कार्ट्स की भूमिका बढ़ेगी, जहां Amazon और Flipkart जैसे प्लेटफॉर्म्स बड़े पैमाने पर EVs इस्तेमाल कर रहे हैं।
अंत में, AVAS से भारत की सड़कें सुरक्षित बनेंगी, खासकर घनी आबादी वाले इलाकों में।
Disclaimer: यह लेख समाचार, रिपोर्ट और टिप्स पर आधारित है। इसमें दिए गए विचार और जानकारी सामान्य हैं तथा पेशेवर सलाह के रूप में नहीं लिए जाने चाहिए।






