“भारतीय बैंकिंग सेक्टर में अनसिक्योर्ड लोन की राशि FY25 में 46.9 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जो FY05 के 2 लाख करोड़ से भारी वृद्धि दर्शाती है। प्रमुख NBFC और फिनटेक कंपनियां जैसे Bajaj Finance, HDFC, BharatPe और Moneyview इस सेगमेंट में आगे रहीं, लेकिन बढ़ते जोखिम से बैंकों की एसेट क्वालिटी पर दबाव बढ़ा है। RBI की चेतावनियों के बावजूद खुदरा उधार में तनाव जारी, जिससे NPA रेशियो प्रभावित हो सकता है।”
अनसिक्योर्ड लोन की वृद्धि और प्रमुख खिलाड़ी
भारतीय बैंकिंग सिस्टम में अनसिक्योर्ड लोन की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है, जहां कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखी जाती। इस सेगमेंट में कुल बकाया राशि अब लगभग 47 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुकी है, जो अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता उधार की बढ़ती मांग को दिखाता है। NBFC और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स ने इस वृद्धि को नेतृत्व दिया, क्योंकि वे तेज अप्रूवल और आसान पहुंच प्रदान करते हैं।
प्रमुख कंपनियों का प्रदर्शन
नीचे दी गई तालिका में अनसिक्योर्ड लोन देने वाली शीर्ष कंपनियों की सूची है, जो बाजार हिस्सेदारी और वॉल्यूम के आधार पर तैयार की गई है:
| कंपनी का नाम | अनसिक्योर्ड लोन का अनुमानित योगदान (लाख करोड़ रुपये में) | प्रमुख विशेषताएं |
|---|---|---|
| Bajaj Finance | 8.5 | रिटेल पर्सनल लोन में मजबूत पकड़ |
| HDFC Bank | 7.2 | क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन का बड़ा पोर्टफोलियो |
| BharatPe | 5.1 | MSME और छोटे उधार पर फोकस |
| Moneyview | 4.3 | फिनटेक आधारित इंस्टेंट लोन |
| CASHe | 3.8 | कम ब्याज दरों पर पर्सनल लोन |
| FlexiLoans | 3.2 | छोटे बिजनेस के लिए अनसिक्योर्ड फंडिंग |
| Mobikwik | 2.9 | वॉलेट-बेस्ड लोन और क्रेडिट लाइन |
ये कंपनियां कुल अनसिक्योर्ड लोन के 40% से अधिक हिस्से पर कब्जा रखती हैं, जहां Bajaj Finance और HDFC जैसी पारंपरिक NBFC ने फिनटेक की चुनौती का सामना करते हुए अपनी स्थिति मजबूत की है।
बैंकों पर मंडराते जोखिम
अनसिक्योर्ड लोन में बढ़ोतरी से बैंकों की जोखिम संवेदनशीलता बढ़ गई है, क्योंकि ये लोन बिना कोलैटरल के दिए जाते हैं। RBI की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि रिटेल अनसिक्योर्ड सेगमेंट में स्ट्रेस बढ़ रहा है, जहां इम्पेयर्ड लोन रेशियो FY25 में 2.4% के आसपास रह सकता है। पोर्टफोलियो-ऐट-रिस्क NBFC के लिए 1.4% तक पहुंच गया, जो पिछले साल से 0.3% की वृद्धि है।
मुख्य जोखिम कारक
डिफॉल्ट रेट में वृद्धि : छोटे लोन (20,000 रुपये से कम) में डिफॉल्ट की दर 1.1% से बढ़कर 1.4% हो गई, जो MSME और रिटेल सेगमेंट को प्रभावित कर रही है।
कंसंट्रेशन रिस्क : कुल क्रेडिट का बड़ा हिस्सा कुछ NBFC और फिनटेक पर निर्भर, जो सिस्टेमिक रिस्क बढ़ाता है।
RBI की सख्ती : रिजर्व बैंक ने अनसिक्योर्ड रिटेल लेंडिंग पर चेतावनी जारी की, लेकिन सुधार के संकेतों के बावजूद मॉनिटरिंग जारी है।
NPA प्रभाव : GNPA रेशियो 2.31% तक गिरा, लेकिन अनसिक्योर्ड सेगमेंट में तनाव से यह फिर बढ़ सकता है।
ये जोखिम बैंकों के प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर सकते हैं, खासकर छोटे फाइनेंस बैंकों के रिटेल पोर्टफोलियो पर। NBFC का GNPA 3.08% पर स्थिर रहा, लेकिन माइक्रोफाइनेंस में समस्या बनी हुई है।
Disclaimer: यह रिपोर्ट उपलब्ध डेटा और ट्रेंड्स पर आधारित है, जो सूचना मात्र के लिए है। निवेश या वित्तीय निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।






