“हावड़ा जंक्शन भारत का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन है, जो 1854 में स्थापित हुआ और अब 23 प्लेटफॉर्म के साथ रोजाना 10 लाख से अधिक यात्रियों को संभालता है। इसका मूल निर्माण खर्च लगभग 2.5 लाख रुपये था, जबकि वर्तमान विस्तार में करोड़ों रुपये लगे हैं। स्टेशन का इतिहास ईस्ट इंडियन रेलवे से जुड़ा है और यह पूर्वी भारत का प्रमुख गेटवे बना हुआ है।”
हावड़ा जंक्शन का ऐतिहासिक महत्व हावड़ा जंक्शन, कोलकाता में स्थित, भारत का सबसे पुराना और सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन है। यह ईस्ट इंडियन रेलवे की शुरुआत का प्रतीक है, जहां पहली ट्रेन 15 अगस्त 1854 को हावड़ा से हुगली के लिए रवाना हुई। स्टेशन का डिजाइन ब्रिटिश इंजीनियर जॉर्ज टर्नबुल द्वारा तैयार किया गया, जिसने रेल नेटवर्क को पूर्वी भारत में मजबूत आधार दिया। वर्तमान में, यह दक्षिण पूर्व रेलवे का मुख्यालय है और दिल्ली, मुंबई, चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
संरचना और क्षमता स्टेशन दो कॉम्प्लेक्स में बंटा है: पुराना कॉम्प्लेक्स (प्लेटफॉर्म 1-15) और नया कॉम्प्लेक्स (प्लेटफॉर्म 17-23)। कुल 23 प्लेटफॉर्म के साथ, यह देश में सबसे अधिक ट्रेन हैंडलिंग क्षमता वाला स्टेशन है। रोजाना 600 से अधिक पैसेंजर ट्रेनें यहां से गुजरती हैं, जिसमें लंबी दूरी की एक्सप्रेस और लोकल ट्रेनें शामिल हैं। प्लेटफॉर्म 1 को हाल ही में विस्तारित किया गया, जिसकी लंबाई अब 916 मीटर से अधिक है, और आगे 1,296 मीटर तक बढ़ाने की योजना है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| प्लेटफॉर्म संख्या | 23 (पुराना: 15, नया: 8, विस्तार में 24-25) |
| दैनिक यात्री संख्या | 10 लाख से अधिक |
| ट्रेन संख्या | 600+ पैसेंजर ट्रेनें |
| कुल क्षेत्र | 930 मीटर लंबा मुख्य प्लेटफॉर्म |
| कनेक्टिविटी | मेट्रो स्टेशन से जुड़ा, हुगली नदी के किनारे |
निर्माण लागत और विकास मूल स्टेशन का निर्माण 1851-1854 के बीच हुआ, जिसमें अनुमानित 2.5 लाख रुपये खर्च हुए। उस समय चार टेंडर प्राप्त हुए, जिनमें लागत 1.9 लाख से 2.74 लाख रुपये तक थी। 1905 में नई इमारत का निर्माण हुआ, जिसमें अतिरिक्त प्लेटफॉर्म जोड़े गए और खर्च बढ़कर लाखों में पहुंचा। 1980-90 के दशक में नया कॉम्प्लेक्स बनाया गया, जिसकी लागत करोड़ों रुपये थी। वर्तमान विस्तार परियोजनाओं में, जैसे प्लेटफॉर्म एक्सटेंशन और मेट्रो इंटीग्रेशन, भारतीय रेलवे ने 100 करोड़ रुपये से अधिक निवेश किया है, जिसमें बैंकिम सेतु के नीचे गुड्स प्लेटफॉर्म को जोड़ना शामिल है।
प्रमुख विकास चरण
1854 : पहला प्लेटफॉर्म और लाइन शुरू, ईस्ट इंडियन रेलवे द्वारा।
1905 : छह अतिरिक्त प्लेटफॉर्म जोड़े, नई इमारत का उद्घाटन।
1954 : इलेक्ट्रिफिकेशन पूरा।
1992 : नया कॉम्प्लेक्स चालू, प्लेटफॉर्म संख्या 18 तक पहुंची।
2009 : चार और प्लेटफॉर्म जोड़े।
2024 : मेट्रो स्टेशन जुड़ा, यात्रा सुविधा बढ़ी।
वर्तमान : प्लेटफॉर्म 24-25 का निर्माण जारी, कुल क्षमता वृद्धि।
वर्तमान चुनौतियां और सुधार स्टेशन की व्यस्तता के कारण भीड़ प्रबंधन प्रमुख मुद्दा है। भारतीय रेलवे ने डिजिटल टिकटिंग, CCTV सर्विलांस और वाई-फाई जैसी सुविधाएं जोड़ी हैं। हाल के वर्षों में, साफ-सफाई और सुरक्षा के लिए स्वच्छ भारत अभियान के तहत करोड़ों रुपये खर्च हुए। स्टेशन अब इंटरसिटी बस और फेरी सर्विस से भी जुड़ा है, जो कोलकाता की ट्रांसपोर्ट हब की भूमिका मजबूत करता है।
Disclaimer: यह एक समाचार रिपोर्ट है जो उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और किसी भी प्रकार की सलाह नहीं मानी जानी चाहिए।






