बजट 2026: ऑटो सेक्टर की ये बड़ी उम्मीदें, क्या कार-बाइक खरीदना होगा आसान?

By Ravi Singh

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बजट 2026 में ऑटोमोबाइल सेक्टर की उम्मीदें दर्शाती इमेज, जिसमें कार, बाइक और EV कंपोनेंट्स दिखाई दे रहे हैं।
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“बजट 2026 में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री EV एडॉप्शन को बढ़ावा देने, इनपुट कॉस्ट कम करने और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट पर फोकस कर सकती है। कार मैन्युफैक्चरर्स एंट्री-लेवल व्हीकल्स के लिए अफोर्डेबिलिटी मांग रहे हैं, जबकि मोटरसाइकिल कंपनियां रूरल डिमांड बूस्ट चाहती हैं। टायर इंडस्ट्री नैचुरल रबर पर ड्यूटी रेशनलाइजेशन की उम्मीद कर रही है, और हेलमेट मेकर्स सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के लिए इंसेंटिव्स की मांग कर रहे हैं। कुल मिलाकर, सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ और एक्सपोर्ट बूस्ट के लिए पॉलिसी क्लैरिटी चाहता है।”

बजट 2026: ऑटोमोबाइल सेक्टर को क्या हैं उम्मीद, कार, मोटरसाइकिल, टायर, हेलमेट निर्माताओं की क्या हैं मांग

ऑटोमोबाइल सेक्टर भारत की इकोनॉमी का एक प्रमुख पिलर है, जो जीडीपी में लगभग 7% योगदान देता है और लाखों रोजगार पैदा करता है। बजट 2026 में इस सेक्टर की उम्मीदें मुख्य रूप से सस्टेनेबल मोबिलिटी, मैन्युफैक्चरिंग बूस्ट और कॉस्ट रिडक्शन पर केंद्रित हैं। इंडस्ट्री लीडर्स का मानना है कि पॉलिसी कंटिन्यूटी और टार्गेटेड इंसेंटिव्स से सेक्टर की ग्रोथ को डबल डिजिट में पहुंचाया जा सकता है।

EV सेक्टर में तेजी लाने के लिए, मैन्युफैक्चरर्स PLI स्कीम में बदलाव मांग रहे हैं, जिसमें बैटरी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य क्रिटिकल कंपोनेंट्स की लोकलाइजेशन पर ज्यादा फोकस हो। डेलॉयट इंडिया के अनुसार, टैक्स ब्रेक्स और कैपिटल गुड्स प्रोडक्शन पर इंसेंटिव्स से EV वैल्यू चेन को मजबूत किया जा सकता है। वर्तमान में, EV कंपोनेंट्स व्हीकल कॉस्ट का 40-50% हिस्सा होते हैं, इसलिए ड्यूटी एग्जेम्प्शन से कीमतें 20% तक कम हो सकती हैं।

कार मैन्युफैक्चरर्स की मांगें मुख्य रूप से एंट्री-लेवल कारों की अफोर्डेबिलिटी पर हैं। KPMG के एक्सपर्ट्स सुझाव दे रहे हैं कि स्मॉल कारों के लिए CKD किट्स पर ड्यूटी रेशनलाइजेशन और लोकलाइजेशन माइलस्टोन्स से OEMs को कॉस्ट मैनेजमेंट में मदद मिलेगी। हाइब्रिड व्हीकल्स के लिए कंसेसनल GST रेट्स या कस्टम्स ड्यूटी बेनिफिट्स की डिमांड है, क्योंकि ये टेक्नोलॉजी EV ट्रांजिशन का ब्रिज बन सकती है। स्क्रैपेज इंसेंटिव्स को एक्सटेंड करने से पुरानी कारों को रिप्लेस करने में स्पीड आएगी, जो डिमांड को 15% तक बढ़ा सकता है।

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मोटरसाइकिल सेक्टर में, टू-व्हीलर मेकर्स रूरल इनकम सपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेंडिंग पर जोर दे रहे हैं। डुकाटी इंडिया जैसे प्रीमियम ब्रैंड्स हाई-पर्फॉर्मेंस मोटरसाइकिल्स के लिए GST रेट्स को हार्मोनाइज करने की मांग कर रहे हैं, ताकि एडवांस्ड सेफ्टी फीचर्स ज्यादा एक्सेसिबल हों। EV टू-व्हीलर्स के लिए पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर हाई स्पेंडिंग की उम्मीद है, क्योंकि रेंज एंग्जाइटी अभी भी एक बड़ी बैरियर है। इंडस्ट्री का अनुमान है कि बजट में EV चार्जिंग नेटवर्क के लिए 10,000 करोड़ रुपये का अलोकेशन से अडॉप्शन रेट 30% बढ़ सकता है।

टायर मैन्युफैक्चरर्स नैचुरल रबर की वोलेटिलिटी से जूझ रहे हैं, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इम्पोर्ट करता है। योकोहामा इंडिया के लीडर्स ड्यूटी रेशनलाइजेशन की मांग कर रहे हैं, जो इनपुट कॉस्ट को 10-15% कम कर सकता है। SUV और प्रीमियम व्हीकल्स की बढ़ती डिमांड से लार्ज रिम डायमीटर टायर्स की जरूरत बढ़ी है, इसलिए एक्सपोर्ट-फ्रेंडली पॉलिसीज से ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस मजबूत होगी। टायर इंडस्ट्री का टार्गेट है कि बजट में रॉ मटेरियल स्टेबिलिटी के लिए स्पेशल इंसेंटिव्स, जो मार्जिन्स को प्रोटेक्ट करेंगे।

हेलमेट मैन्युफैक्चरर्स सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को प्रमोट करने के लिए इंसेंटिव्स मांग रहे हैं। BIS सर्टिफाइड हेलमेट्स पर GST रिडक्शन या सब्सिडी से कंज्यूमर एडॉप्शन बढ़ सकता है, क्योंकि रोड एक्सीडेंट्स में हेलमेट की कमी एक बड़ा फैक्टर है। इंडस्ट्री का सुझाव है कि बजट में सेफ्टी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए PLI-लाइक स्कीम, जो लोकल प्रोडक्शन को बूस्ट देगी और इम्पोर्ट डिपेंडेंसी कम करेगी।

ऑटो सेक्टर की प्रमुख मांगें एक नजर में:

सेक्टरप्रमुख मांगेंसंभावित प्रभाव
कार मैन्युफैक्चरर्सएंट्री-लेवल कारों के लिए ड्यूटी रिडक्शन, हाइब्रिड पर GST कंसेसन, स्क्रैपेज इंसेंटिव्सडिमांड में 15-20% ग्रोथ, EV ट्रांजिशन स्पीड-अप
मोटरसाइकिल मेकर्सरूरल डिमांड बूस्ट, EV चार्जिंग इंफ्रा, GST हार्मोनाइजेशनटू-व्हीलर सेल्स 25% बढ़ोतरी, प्रीमियम सेगमेंट एक्सपेंशन
टायर इंडस्ट्रीनैचुरल रबर पर ड्यूटी रेशनलाइजेशन, इनपुट कॉस्ट स्टेबिलिटीमार्जिन्स में 10% इम्प्रूवमेंट, एक्सपोर्ट बूस्ट
हेलमेट मैन्युफैक्चरर्ससेफ्टी स्टैंडर्ड्स पर इंसेंटिव्स, GST रिडक्शनएडॉप्शन रेट 30% ऊपर, लोकल मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ

इंडस्ट्री का फोकस ग्लोबल वैल्यू चेन इंटीग्रेशन पर है, जहां कस्टम्स ड्यूटी कंसेसन और R&D इंसेंटिव्स से भारत को ऑटो हब बनाया जा सकता है। 2025 में रिकॉर्ड एक्सपोर्ट्स के बाद, सेक्टर का लक्ष्य है कि बजट में मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव्स से एक्सपोर्ट शेयर डबल हो। इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेंडिंग से लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम होगी, जो व्हीकल ऑपरेटिंग एक्सपेंस को 5-7% घटा सकती है।

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EV मैन्युफैक्चरिंग को प्रमोट करने के लिए, गवर्नमेंट SPMEPCI स्कीम को रिवैंप कर सकती है, जिसमें इंडिया-EU FTA को ध्यान में रखते हुए इंसेंटिव्स और इम्पोर्ट ड्यूटी कट्स शामिल हों। प्रीमियम EV मेकर्स को लोकल प्रोडक्शन बेस सेटअप के लिए अट्रैक्ट करने से फॉरेन इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा। ऑटो कंपोनेंट सप्लायर्स बैटरी मटेरियल्स, कंट्रोलर्स और मोटर्स पर ड्यूटी एग्जेम्प्शन मांग रहे हैं, जो ओवरऑल व्हीकल कॉस्ट को ऑप्टिमाइज करेगा।

रूरल डिमांड को बूस्ट करने के लिए, बजट में इनकम सपोर्ट मेजर्स जैसे हाई अलोकेशन फॉर रोड्स और ट्रांसपोर्ट इंफ्रा की उम्मीद है। ऑटो इंडस्ट्री का अनुमान है कि इससे टू-व्हीलर और एंट्री-लेवल कार सेल्स में 20% उछाल आएगा। सस्टेनेबल मोबिलिटी के लिए, क्लीन मोबिलिटी सपोर्ट और अल्टरनेटिव फ्यूल टेक्नोलॉजीज पर इंसेंटिव्स सेक्टर को फ्यूचर-प्रूफ बनाएंगे।

टायर सेक्टर में प्रीमियमाइजेशन ट्रेंड मजबूत है, जहां OEM रिक्वायरमेंट्स लार्जर रिम डायमीटर्स की ओर शिफ्ट हो रही हैं। बजट में एक्सपोर्ट-फ्रेंडली पॉलिसीज से इंडियन टायर मेकर्स ग्लोबल मार्केट में कॉम्पिटिटिव बनेंगे। हेलमेट इंडस्ट्री रोड सेफ्टी को प्रमोट करने के लिए पब्लिक अवेयरनेस कैंपेन और मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव्स की मांग कर रही है, जो एक्सीडेंट रेट को 15% कम कर सकता है।

कुल मिलाकर, बजट 2026 ऑटो सेक्टर के लिए गियर शिफ्ट का मौका है, जहां स्टेबिलिटी, स्केल और सस्टेनेबिलिटी पर फोकस से इंडिया को ग्लोबल ऑटो पावरहाउस बनाया जा सकता है। इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि टार्गेटेड मेजर्स से डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग मजबूत होगी और क्लीन मोबिलिटी ट्रांजिशन स्पीड पकड़ेगी।

Disclaimer: यह लेख समाचार रिपोर्टों, इंडस्ट्री टिप्स और स्रोतों पर आधारित है।

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Ravi Singh

मेरा नाम रवि सिंह है, मैं एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करता हूँ और मुझे लेख लिखना बहुत पसंद है। 4 साल के ब्लॉगिंग अनुभव के साथ मैं हमेशा दूसरों को प्रेरित करने और उन्हें सफल ब्लॉगर बनाने के लिए ज्ञान साझा करने के लिए तैयार रहता हूँ।

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