“यूरो NCAP के नए नियमों से 2026 से विदेशी कारों में फिजिकल बटन की वापसी हो रही है, जबकि भारत में टाटा और महिंद्रा जैसे ब्रांड ट्रिपल टचस्क्रीन सिस्टम को बढ़ावा दे रहे हैं। सुरक्षा चिंताओं के कारण विदेशी निर्माता टचस्क्रीन से दूर हो रहे, लेकिन भारतीय बाजार में बड़े स्क्रीन और कनेक्टेड फीचर्स की मांग बढ़ रही है।”
विदेशी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में टचस्क्रीन का दौर अब पीछे छूट रहा है। यूरो NCAP के नए सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के तहत जनवरी 2026 से कारों को 5-स्टार रेटिंग पाने के लिए इंडिकेटर्स, हॉर्न, हेजर्ड लाइट्स, विंडस्क्रीन वाइपर्स और eCall जैसे फंक्शन्स के लिए फिजिकल कंट्रोल्स जरूरी होंगे। रिसर्च से पता चला है कि टचस्क्रीन इस्तेमाल करने पर ड्राइवर्स की रिएक्शन टाइम 30% तक बढ़ जाती है और आंखें सड़क से ज्यादा देर हटती हैं।
Volkswagen ने घोषणा की है कि उसके नए मॉडल्स जैसे ID Polo में वॉल्यूम, सीट हीटिंग और फैन कंट्रोल्स के लिए फिजिकल बटन वापस आएंगे। Hyundai की नई Santa Fe में भी ज्यादा बटन ऐड किए गए हैं, जहां डिजाइन डायरेक्टर Ha Hak-soo ने माना कि कस्टमर्स टचस्क्रीन-ओनली सिस्टम्स पसंद नहीं करते। Mercedes-Benz ने डेटा एनालिसिस के बाद रॉकर कंट्रोल्स और बटन बढ़ाने का फैसला किया, खासकर चाइनीज मार्केट के अलावा ग्लोबल मॉडल्स में। Subaru की 2026 Outback और Porsche के कुछ मॉडल्स भी इस ट्रेंड को फॉलो कर रहे हैं।
भारत में स्थिति उलटी है। यहां ऑटोमोटिव टचस्क्रीन डिस्प्ले मार्केट 2024 में 6.11 बिलियन USD पर पहुंचा और 2030 तक 10.98 बिलियन USD होने का अनुमान है। Tata Motors और Mahindra SUVs में ट्रिपल-स्क्रीन डैशबोर्ड स्टैंडर्ड बन रहे हैं, जैसे Tata Sierra और Mahindra XEV 9S में ड्राइवर डिस्प्ले, इंफोटेनमेंट टचस्क्रीन और पैसेंजर स्क्रीन। MG Windsor EV में 15.6-इंच का बड़ा टचस्क्रीन है जो ORVMs जैसे फंक्शन्स कंट्रोल करता है।
Bharat NCAP क्रैश सेफ्टी पर फोकस करता है, न कि इंटरफेस एर्गोनॉमिक्स पर, इसलिए भारतीय मैन्युफैक्चरर्स टेक अपील पर जोर दे रहे। 2026 में Tata Punch फेसलिफ्ट में 10.25-इंच टचस्क्रीन और डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर आएगा, साथ ही टच-बेस्ड AC कंट्रोल्स। एशिया-पैसिफिक रीजन में ऑटोमोटिव टचस्क्रीन कंट्रोल सिस्टम्स मार्केट सबसे तेज बढ़ रहा, जहां भारत, चीन और जापान में urbanization और disposable income बढ़ने से डिमांड बढ़ी है।
प्रमुख अंतर: विदेश बनाम भारत
क्यों हो रहा ये बदलाव?
| पैरामीटर | विदेशी मार्केट (2026 ट्रेंड्स) | भारतीय मार्केट (2026 ट्रेंड्स) |
|---|---|---|
| सेफ्टी फोकस | डिस्ट्रैक्शन कम करने के लिए फिजिकल बटन जरूरी (Euro NCAP) | क्रैश प्रोटेक्शन पर जोर (Bharat NCAP), इंटरफेस पर कम रेगुलेशन |
| डिजाइन ट्रेंड | टचस्क्रीन से दूर, बटन और नॉब्स की वापसी (Volkswagen, Hyundai) | बड़े स्क्रीन और मल्टी-डिस्प्ले (Tata, Mahindra) |
| कस्टमर प्रेफरेंस | सेफ्टी और सिंप्लिसिटी (J.D. Power स्टडी: 70% ड्राइवर्स फिजिकल कंट्रोल्स चाहते) | टेक-ड्रिवन फीचर्स और कनेक्टिविटी (360-डिग्री कैमरा, वॉयस असिस्टेड सनरूफ) |
| मार्केट ग्रोथ | सेफ्टी रेगुलेशंस से प्रभावित, टचस्क्रीन ग्रोथ स्लो | टचस्क्रीन मार्केट 5.61% CAGR से बढ़ रहा, EVs में ज्यादा ऐडॉप्शन |
सुरक्षा चिंताएं: विदेशों में स्टडीज दिखाती हैं कि टचस्क्रीन से रोड हेजर्ड्स पर रिएक्शन टाइम बढ़ती है, इसलिए रेगुलेटर्स जैसे Euro NCAP एक्शन ले रहे।
भारतीय डिमांड: यहां कस्टमर्स कनेक्टेड कार ऐप्स और बड़े स्क्रीन चाहते, जैसे रीयल-टाइम नेविगेशन और एंटरटेनमेंट। 2026 में EVs जैसे Tata Punch में 6 एयरबैग्स के साथ टच फीचर्स स्टैंडर्ड होंगे।
इकोनॉमिक फैक्टर्स: विदेशों में कॉस्ट-सेविंग से टचस्क्रीन आए, लेकिन अब सेफ्टी रेटिंग्स से बटन वापस। भारत में urbanization से टचस्क्रीन डिस्प्ले की डिमांड 7.8% CAGR से बढ़ रही।
## डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सामान्य जानकारी, टिप्स और उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है।






