“सर्दियों में ठंड से इंजन ऑयल गाढ़ा हो जाता है, टायर प्रेशर घटता है और इंजन को ऑपरेटिंग तापमान तक पहुंचने में ज्यादा समय लगता है, जिससे माइलेज 10-20% तक कम हो सकती है। छोटी ड्राइव्स और हीटर का इस्तेमाल भी ईंधन खपत बढ़ाता है, लेकिन सही रखरखाव से इस असर को कम किया जा सकता है।”
सर्दियों में वाहनों की माइलेज गिरना एक आम समस्या है, खासकर उत्तर भारत में जहां तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। सरकारी ईंधन टेस्ट्स के अनुसार, 20 डिग्री सेल्सियस की तुलना में -5 डिग्री सेल्सियस पर ईंधन दक्षता 10% तक कम हो जाती है। अगर ड्राइव 4 मील से कम हो, तो यह गिरावट 20% तक पहुंच सकती है। पेट्रोल और डीजल कारों में ठंडी हवा घनी होने से एयर-फ्यूल मिक्सचर प्रभावित होता है, जो इंजन को ज्यादा ईंधन जलाने पर मजबूर करता है।
इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) में बैटरी क्षमता ठंड से 15% तक प्रभावित होती है, क्योंकि हीटिंग सिस्टम अतिरिक्त एनर्जी खींचता है। Li Auto जैसे ब्रांड्स ने हाल ही में विंटर रेंज एंग्जाइटी को कम करने के लिए नई तकनीकें पेश की हैं, लेकिन सामान्य EVs में यह समस्या बनी रहती है।
मुख्य कारण और उनका असर
इंजन ऑयल का गाढ़ा होना: ठंड में ऑयल की चिपचिपाहट बढ़ जाती है, जिससे इंजन पार्ट्स के बीच घर्षण बढ़ता है। इससे इंजन को शुरू होने में 12% ज्यादा ईंधन लगता है। उत्तर भारत में जहां तापमान 0 डिग्री के आसपास रहता है, यह असर सबसे ज्यादा दिखता है।
इंजन वार्म-अप में देरी: ठंडा इंजन ऑप्टिमल तापमान तक पहुंचने में ज्यादा समय लेता है। छोटी ट्रिप्स (जैसे 5-10 किमी) में इंजन पूरी तरह गर्म नहीं होता, जिससे ईंधन बर्बाद होता है। अध्ययनों से पता चलता है कि 20 डिग्री से नीचे तापमान में यह प्रक्रिया 2-3 मिनट extra लेती है।
टायर प्रेशर में कमी: ठंड से टायरों की हवा सिकुड़ती है, जिससे रोलिंग रेसिस्टेंस बढ़ता है। हर 10 डिग्री तापमान गिरावट पर टायर प्रेशर 1 PSI कम होता है, जो माइलेज को 2-3% प्रभावित करता है।
हीटर और AC का इस्तेमाल: केबिन को गर्म रखने के लिए हीटर चलाना ईंधन खपत बढ़ाता है। ICE कारों में यह 5-10% extra फ्यूल यूज करता है, जबकि EVs में रेसिस्टर-बेस्ड हीटिंग बैटरी रेंज को 15% तक घटा देता है।
ट्रैफिक और ड्राइविंग हैबिट्स: स्टॉप-एंड-गो ट्रैफिक में ठंडी सड़कें ब्रेकिंग बढ़ाती हैं, जो माइलेज को और खराब करता है। आक्रामक ड्राइविंग, जैसे तेज एक्सीलरेशन, ठंड में 8-10% ज्यादा ईंधन जलाती है।
माइलेज सुधारने के तरीके
यहां कुछ व्यावहारिक टिप्स दिए गए हैं जो भारतीय ड्राइवर्स के लिए उपयोगी हैं:
| कारण | सुधार टिप्स | अपेक्षित लाभ |
|---|---|---|
| इंजन ऑयल गाढ़ा होना | विंटर-ग्रेड सिंथेटिक ऑयल यूज करें, जैसे 5W-30 | 5-7% बेहतर माइलेज |
| इंजन वार्म-अप देरी | कार को 1-2 मिनट आइडल रखें, छोटी ट्रिप्स कम्बाइन करें | 10% ईंधन बचत छोटी ड्राइव्स में |
| टायर प्रेशर कमी | हफ्ते में एक बार प्रेशर चेक करें, मैन्युफैक्चरर स्पेक फॉलो करें | 2-4% माइलेज इम्प्रूवमेंट |
| हीटर इस्तेमाल | जरूरत से ज्यादा न चलाएं, विंडशील्ड डिफॉग के लिए AC यूज करें | 5% कम ईंधन खपत |
| ड्राइविंग हैबिट्स | स्मूद एक्सीलरेशन रखें, स्पीड 60-80 किमी/घंटा मेंटेन करें | कुल 8-12% बेहतर दक्षता |
ये तरीके अपनाकर आप सर्दियों में माइलेज को 15% तक सुधार सकते हैं। EVs के लिए, बैटरी प्री-हीटिंग फीचर वाले मॉडल चुनें, जैसे Tata Nexon EV, जो ठंड में बेहतर परफॉर्म करते हैं। अगर समस्या बनी रहती है, तो मैकेनिक से इंजन ट्यूनिंग करवाएं, क्योंकि गंदा एयर फिल्टर या फॉल्टी सेंसर भी माइलेज प्रभावित करते हैं।
Disclaimer: यह लेख सामान्य रिपोर्ट्स, टिप्स और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है।






